अनुपमा के जीवन में अब ‘इमोशनल स्टेबिलिटी’ की भारी कमी दिख रही है। 26 जनवरी के एपिसोड में कहानी तब गरमा गई जब रजनी ने अनुपमा को अपने पक्ष में करने के लिए भारी रिश्वत का ऑफर दिया। जहाँ अनुपमा ने अपने वसूलों पर टिके रहते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया, वहीं घर के अंदर से ही उसके खिलाफ एक नया मोर्चा खुल गया है। राही और माही ने अपनी माँ की कार्यशैली और उनके फैसलों की तीखी आलोचना की है।
रजनी का ‘बाइ-बैक’ ऑफर और अनुपमा का स्टैंड
रजनी ने इस बार सीधा हमला किया और अनुपमा को पैसों के दम पर खरीदने की कोशिश की। अगर इसे प्रोफेशनल नजरिए से देखें, तो यह अनुपमा के ‘इथिक्स’ को टेस्ट करने वाला एक ‘होस्टाइल टेकओवर’ जैसा था। अनुपमा ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस डील को ठुकरा दिया, लेकिन इसकी कीमत उसे अपने बच्चों की नाराजगी के रूप में चुकानी पड़ रही है।
राही और माही: जब सपोर्ट सिस्टम ही ‘लायबिलिटी’ बन जाए
कहानी में सबसे बड़ा डेटा पॉइंट यह है कि जो बच्चे अब तक अनुपमा की ताकत थे, अब वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरे हैं। राही और माही ने अनुपमा पर आरोप लगाया कि उसकी ‘आदर्शवादी छवि’ की वजह से पूरे परिवार को नुकसान उठाना पड़ता है। राही के कड़े शब्दों ने यह साफ कर दिया कि नई पीढ़ी अब अनुपमा के पुराने ‘त्याग वाले मॉडल’ को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। बाजार (दर्शकों) में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि क्या राही का यह गुस्सा जायज है?
द ‘कॉन्ट्रास्ट’ व्यू: क्या अनुपमा का व्यवहार अब ‘आउटडेटेड’ हो चुका है?
सोशल मीडिया और फैन सर्कल्स में अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या अनुपमा का हर स्थिति में ‘परफेक्ट’ बनने की कोशिश करना अब अव्यावहारिक (Impractical) होता जा रहा है? जब घर की आर्थिक और मानसिक शांति दांव पर हो, तब क्या अनुपमा को थोड़ा फ्लेक्सिबल नहीं होना चाहिए? राही और माही का विरोध इसी ‘रियलिटी चेक’ की ओर इशारा करता है कि सिर्फ आदर्शों से घर नहीं चलता।
द बॉटम लाइन
अनुपमा फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ उसके ‘मोरल एसेट्स’ तो बढ़ रहे हैं, लेकिन ‘फैमिली इक्विटी’ गिरती जा रही है। रजनी का अगला कदम और बच्चों का यह विद्रोह आने वाले हफ्तों में ड्रामा की ‘वोलैटिलिटी’ को और बढ़ाएगा। अब सवाल यह है कि क्या अनुपमा अपनी साख बचाने के चक्कर में अपने बच्चों का भरोसा पूरी तरह खो देगी?