क्या आप भी पुराने रेंट सिस्टम से परेशान हैं? अगर आपने कभी दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों में किराए पर घर लिया है, तो आप यह दर्द जरूर समझते होंगे। कभी 8–10 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट, कभी बिना बताए किराया बढ़ा देना, और कभी-कभी तो मकान मालिक का बिना सूचना दिए घर आ जाना। एक बार मेरे एक दोस्त ने बेंगलुरु में 9 महीने का डिपॉजिट दिया था, और घर छोड़ने के बाद 3 महीने तक माकन मालिक ने पैसे वापस नहीं किया। यह अकेला मामला नहीं है बल्कि, ऐसे हजारों किरायेदार हर साल इसी परेशानी से गुजरते हैं।
लकिन, अब वक्त बदल गया है! साल 2026 से लागू हुए New Home Rent Rules ने रेंटल मार्केट की तस्वीर को पूरी तरह से बदल दी है। अब रेंट एग्रीमेंट केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि एक डिजिटल सुरक्षा कवच हो गया है। अगर आप आने वाले समय में दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों में शिफ्ट होने का सोच रहे हैं, तो यह लेख आपके लाखों रुपये बैजाने में मदद कर सकता है और आपको कानूनी पचड़ों से दूर भी रख सकता है। चलिए जानते हैं उन नियमों के बारे में जो हर किरायेदार और मकान मालिक को पता होना चाहिए।
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सिक्योरिटी डिपॉजिट पर लगा सख्त कैप
पहले क्या होता था? खासतौर पर बेंगलुरु जैसे शहरों में मकान मालिक 6 से 10 महीने का किराया एडवांस में मांगते थे। लेकिन New Rent Rules 2026 के हिसाब से अब:
- Residential (आवासीय): अब मकान मालिक ज्यादा से ज्यादा 2 महीने तक का किराया ही सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में ले सकते हैं।
- Commercial (व्यावसायिक): व्यावसायिक संपत्तियों के लिए यह सीमा 6 महीने तक की तय की गई है।
Expert Pro-Tip: एग्रीमेंट में यह जरूर लिखवाएं कि घर खाली करने के कितने दिनों के भीतर डिपॉजिट वापस मिलेगा। नए नियमों के अनुसार, चाबी सौंपने के 7-15 दिनों के भीतर रिफंड मिल जाना चाहिए।
डिजिटल रेंट एग्रीमेंट और 60 दिन का नियम
आज भी कई लोग सिर्फ नोटरी करा कर रेंट एग्रीमेंट बना लेते हैं, लेकिन अब यह तरीका बहोत रिस्की हो चुका है। लकिन अब नए नियमों के अनुसार:
- Mandatory Registration: हर रेंट एग्रीमेंट को डिजिटल स्टैंप के साथ ऑनलाइन रजिस्टर करना जरुरी होगया है।
- Deadline: एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर इसे रेंट अथॉरिटी के पास रजिस्टर करना होगा।
- Penalty: अगर आप इस नियम को नहीं मानते है तो आपको ₹5,000 से लेकर ₹10,000 तक का जुर्माना लग सकता है।
किराया कब और कितना बढ़ेगा?
“अगले महीने से किराया बढ़ेगा” अब यह लाइन यूँ ही बोल देना मकान मालिक के लिए आसान नहीं रहा। नए Rent Hike Rules कहते हैं:
- Notice Period: किराया बढ़ाने से कम से कम 90 दिन पहले किरायेदार को लिखित नोटिस देना जरुरी है।
- Annual Hike: किराया साल में केवल एक बार ही बढ़ाया जा सकता है, जो आमतौर पर 5% से लेकर 10% के बीच होता है (जैसा एग्रीमेंट में तय किया गया हो)। बीच महीने या अचानक किराया बढ़ाना अब माकन मालिक के लिए सही नहीं है।
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मरम्मत को लेकर अब भ्रम नहीं
यह मुद्दा लगभग हर घर में झगड़े की वजह बनता है। लकिन अब नए नियमों ने इस जिम्मेदारी साफ बाँट दी है:
| कार्य (Work) | जिम्मेदारी (Responsibility) |
| स्ट्रक्चरल मरम्मत (छत टपकना, दीवार गिरना) | मकान मालिक (Landlord) |
| सफेदी/पेंटिंग और बिजली के बड़े काम | मकान मालिक (Landlord) |
| छोटे काम (नल का वाशर बदलना, स्विच ठीक करना) | किरायेदार (Tenant) |
| जानबूझकर किया गया नुकसान | किरायेदार (Tenant) |
आपकी प्राइवेसी अब कानूनन सुरक्षित
क्या आपका मकान मालिक आपको बिना बताए कभी भी घर में घुस आता है? तो अब ऐसा करना गैर-कानूनी मन जानेवाला है। Model Tenancy Act 2026 के तहत, मकान मालिक को घर के निरीक्षण या मरम्मत के लिए आने से 24 घंटे पहले नोटिस SMS या WhatsApp के जरिये देना अनिवार्य है। क्यूंकि, किरायेदार सिर्फ रहने वाला नहीं, बल्कि उस समय का कानूनी निवासी होता है।
घर खाली कराने के नियम (Eviction Rules)
अब मकान मालिक मनमर्जी से आपको घर खाली करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। वे केवल इन स्थितियों में ऐसा कर सकते हैं जब:
- लगातार 2 महीने तक किराया न दिया गया हो।
- किरायेदार ने बिना अनुमति के प्रॉपर्टी किसी और को रेंट पर दे दी हो (Subletting)।
- प्रॉपर्टी का उपयोग अवैध काम के लिए हो रहा हो।
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निष्कर्ष
New Home Rent Rules 2026 का मुख्य उद्देश्य रेंटल मार्केट को प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाना है। यह नियम न केवल किरायेदार को मानसिक शांति देते हैं, बल्कि मकान मालिक को भी समय पर किराया और संपत्ति की सुरक्षा की गारंटी देते हैं। चाहे आप किरायेदार हों या मकान मालिक, आज ही अपना डिजिटल रेंट एग्रीमेंट सुनिश्चित करें और विवादों से बचें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। Model Tenancy Act एक फ्रेमवर्क है जिसे अलग-अलग राज्य अपनी जरूरतों के हिसाब से लागू करते हैं। रेंट एग्रीमेंट करने से पहले अपने राज्य के स्थानीय नियमों की जांच अवश्य करें या किसी कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लें।